राष्ट्रगान के रचयिता और एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की आज 156 वीं जयंती पर “नई उम्मीद सोसायटी” के सेक्रेटरी परवेज कौसर ने याद करते हुए देश के युवाओं को ऐसे महान व्यक्ति के देशहित के कार्यों से अवगत कराया।
रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1961 को बंगाल में हुआ था इनको गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं – भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बाँग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।
उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हे सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
उन्होंने पहली कविता 8 वर्ष के उम्र में लिखी और 16 साल के उम्र में ही इनकी लघुकथा प्रकाशित हुई। करीब 2230 गीतों की रचना इन्होंने की है जिसका ज्ञान आज अधिकतर देशवासियों को नहीं है।